रविवार 14 जून 2026 - 18:47
भारत मे अल्लामा अकील अल-ग़रवी के उसूल-ए-फ़िक़्ह के पाठ्यक्रम का शुभारंभ

मौलाना इब्ने हसन अमलोवी ने बताया कि जामेअतुल मुस्तफ़ा अल-आलमिया (शाखा भारत) के तत्वावधान में ऑनलाइन "दर्स-ए-उसूल-ए-फ़िक़्ह" का नियमित शुभारंभ हो चुका है। इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम के लिए प्रसिद्ध विद्वान हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अल्लामा सय्यद अकील अल-ग़रवी को शिक्षक के रूप में चुना गया है, जिनके व्याख्यानों से भारत के विभिन्न क्षेत्रों के फ़ुज़ला (उच्च धार्मिक विद्वान) और छात्र लाभान्वित हो रहे हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जामिअतुल मुस्तफ़ा अल-आलमिया (शाखा भारत) के तत्वावधान में ऑनलाइन "दर्स-ए-उसूल-ए-फ़िक़्ह" का नियमित आरंभ हो चुका है। इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम के लिए प्रसिद्ध विद्वान हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अल्लामा सय्यद अकील अल-ग़रवी को शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है, जिनके व्याख्यानों से भारत के विभिन्न भागों के विद्वान और छात्र लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

मजमअ-ए-उलेमा व वाइज़ीन पूर्वांचल के अध्यक्ष मौलाना इब्ने हसन अमलोवी के अनुसार, जामेअतुल मुस्तफ़ा अल-आलमिया (शाखा भारत) के प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन डॉ. सय्यद कमाल हुसैनी के प्रयासों से इस शैक्षणिक परियोजना को व्यावहारिक रूप दिया गया। इसी सिलसिले में उन्होंने अल्लामा सय्यद अकील अल-ग़रवी से मुलाक़ात की और उन्हें दर्स-ए-उसूल-ए-फ़िक़्ह के अध्यापन की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद इस कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा की गई और 20 शव्वाल 1447 हिजरी, अर्थात 9 अप्रैल 2026 से कक्षाओं का शुभारंभ कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि यह ऑनलाइन पाठ्यक्रम प्रत्येक सप्ताह गुरुवार और शुक्रवार को आयोजित किया जाता है, जिसमें भारत के विभिन्न हौज़ा-ए-इल्मिया और शैक्षणिक केंद्रों से जुड़े फ़ुज़ला और छात्र भाग ले रहे हैं।

इस पहल को भारत के धार्मिक और शैक्षणिक क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है। "दर्स-ए-उसूल-ए-फ़िक़्ह" की परंपरा भारत में नई नहीं है, बल्कि अतीत में भी लखनऊ सहित विभिन्न शैक्षणिक केंद्रों में इस प्रकार के पाठ्यक्रमों का सिलसिला मौजूद रहा है।

मौलाना इब्ने हसन अमलोवी के अनुसार, वर्तमान समय में जब भारत में उलेमा, फ़ुज़ला और छात्रों की संख्या में वृद्धि हुई है, तब उच्च स्तरीय फ़िक़्ही शिक्षा के प्रसार के लिए इस प्रकार के पाठ्यक्रमों की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है। इसी परिप्रेक्ष्य में ऑनलाइन दर्स-ए-उसूल-ए-फ़िक़्ह के शुभारंभ को एक स्वागतयोग्य और दूरगामी शैक्षणिक कदम माना जा रहा है।

उन्होने जामेअतुल मुस्तफ़ा अल-आलमिया (शाखा भारत) के इस चयन और पहल की सराहना करते हुए आशा व्यक्त की है कि इस पाठ्यक्रम के माध्यम से देश में फ़िक़्ही और उसूली अध्ययन को और अधिक बढ़ावा मिलेगा तथा विद्वानों की एक नई पीढ़ी तैयार होगी।

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